सागर की पुरानी बस्ती की प्राथमिक शाला बनी नवाचार की मिसाल

भोपाल। सागर शहर का पंतनगर वार्ड अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग बाहुल्य एक पुरानी बस्ती है। यहाँ एक शासकीय प्राथमिक शाला है, जहां कुल 117 विद्यार्थियों में 80 छात्राएं और 37 छात्र हैं। सुंदर परिसर और सुंदर कक्ष शाला की शोभा हैं। बच्चे खेल और पढ़ाई-लिखाई दोनों में ही दक्ष हैं। शाला के सामने से गुजरें, तो विद्यार्थियों के लयबद्ध स्वरूप में पाठ दोहराने का स्वर कदम रोक देता है। यह पाठशाला अब किसी परिचय की मोहताज नहीं रही। यहां के विद्यार्थी इतने कुशल हैं कि इनसे पहाड़े पूछें, तो पहाड़ों के साथ-साथ कविता भी सुनाते हैं।  

शाला बाल केबिनेट द्वारा संचालित है। बच्चे अपना प्रधानमंत्री खुद चुनते हैं। प्रधानमंत्री शाला के नीतिगत निर्णय लेते हैं। शिक्षा मंत्री पढ़ाई-लिखाई का स्तर बनाए रखने की चिंता करते हैं। सफाई मंत्री शाला की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। पर्यावरण मंत्री परिवेश की शुचिता पर नजर रखते हैं। इस शाला की सबसे रोचक बात यह है कि यहां बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई (लर्न विथ फन) कराई जाती है। बच्चे कविता के रूप में अपने पाठ याद करते हैं। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के शाला सिद्धि कार्यक्रम के तहत चुनी गई सागर जिले की यह प्रथम सिद्धि शाला है, जहां अनेक नवाचारी प्रयोग किये गये हैं। 

राज्यपाल भी पहुँची शाला: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तक इस सिद्धि शाला की प्रसिद्धि पहुँची, तो वे भी इस शाला में आने से खुद को रोक नहीं सकीं। राज्यपाल ने 21 फरवरी को शाला का मुआयना किया। शाला परिसर में पहुंचते ही यहां के सुंदर वातावरण से प्रभावित होकर राज्यपाल ने विद्यार्थियों और अध्यापकों को शाबाशी दी। पटेल बच्चों की प्रगतिशीलता से बेहद प्रभावित हुयीं। उन्होंने सभी बच्चों को अपनी ओर से टॉफियां भी दीं। 

एक दिसंबर 1973 को स्थापित इस प्राथमिक शाला में छात्र-छात्रायें सह-शिक्षा के साथ-साथ अब नवाचारों में भी सहगामी हैं। शाला के प्रधान अध्यापक महेश दुबे जिला-स्तरीय उत्कृष्ट शिक्षक हैं और अन्य शिक्षक भी आत्म-विश्वास से लबरेज हैं। (खबरनेशन)

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