कुपोषित बच्ची के इलाज के लिये बमुश्किल राजी हुए माता-पिता

 भोपाल। दस्तक अभियान की टीम जब धार जिले के ग्राम बंधनिया के 'मोहखोदरा फल्या' पहुँची तो उन्हें दो वर्षीय बालिका प्रमिला अति कुपोषित हालत में मिली। एएनएम और आशा कार्यकर्ता ने उसके माता-पिता पान बाई और मनीष को भरसक समझाने की कोशिश की वे एनआरसी में बालिका को भर्ती कराकर इलाज प्रारंभ करा दें। प्रमिला की माँ इसके लिये बिल्कुल तैयार नहीं हुई।
 

टीम ने तुरन्त इसकी सूचना दस्तक अभियान के लिये बनाये गये ब्लाक स्तरीय कन्ट्रोल रूम को दी। सूचना पर बीएमओ बाग डॉ. आर.के. शिन्दे, बीपीएम अमर सिंह देवल, एनआरसीडीएफडी अनिता मण्डलोई और कम्युनिटी मोबीलाइजर वीरेन्द्र कुमार चोखारे मोबिलिटी वाहन से तुरन्त मोहखोदरा के लिये रवाना हो गये। अनिता मण्डलोई ने बच्ची प्रमिला का पुन: परीक्षण किया और परिवारजनों को कुपोषण से होने वाले खतरों की विस्तार से जानकारी दी। लम्बी समझाईश के बाद उन्होंने परिजनों को एनआरसी में बालिका को 14 दिन तक भर्ती कराकर उपचार कराने के लिये मना लिया। टीम मोबिलिटी वाहन से ही तुरन्त बालिका प्रमिला और उसकी माँ को एनआरसी ले गई। जहाँ उसका इलाज जारी हैं।
 

 प्रदेश में कुपोषित बच्चों की पहचान के लिये लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और महिला एवं बाल विकास की संयुक्त टीमें दस्तक अभियान के तहत गाँव-गाँव जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। धार के बाग विकासखण्ड जैसी जटिल भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में अक्सर ऐसी स्थितियाँ निर्मित होती रहती हैं। इसलिए दस्तक अभियान टीम ऐसे क्षेत्रों का प्राथमिकता आधार पर सर्वेक्षण कर रही हैं। (खबरनेशन / khabarnation)
 

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