आसियान राष्ट्र अध्यक्षों के समागम के ऐतिहासिक नतीजे होंगे
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि गणतंत्र समारोह के दौरान दिल्ली में हुए आसियान राष्ट्र प्रमुखों के समागम के ऐतिहासिक नतीजे हासिल होंगे और वैश्विक पटल पर भारत की भूमिका पर सबकी निगाहे होंगी। हांलाकि विपक्ष और प्रधानमंत्री के आलोचकों का तर्क है कि शपथ ग्रहण समारोह में नरेंद्र मोदी ने दक्षिण एशिया के राष्ट्र अध्यक्षों को भी विशेष तरजीह देकर उम्मीदे बांधी थी। लेकिन सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया। ऐसा होने का कारण पड़ौसी देश पाकिस्तान की नकारात्मक भूमिका से हुआ। लेकिन आसियान देशो के समागम में ऐसा कोई अंदेशा नहीं है, क्योंकि इनके और भारत के बीच में कोई सीमा विवाद नहीं है। उल्टे नीतिगत भिन्नता के बावजूद सभी से व्यापारिक, राजनैतिक संबंध और सरोकार हैं। आसियान देशों में न तो चीन जैसे स्पर्धी हैं और न पाकिस्तान की तरह पूर्वाग्रह ग्रस्त देश हैं।
डॉ. विजयवर्गीय ने कहा कि आसियान देशों की आबादी 60 करोड़ भारत से आधी होते हुए उनकी अर्थव्यवस्था 213 लाख करोड़ रू. है जो भारत से 33 प्रतिशत अधिक है। आसियान और भारत की कुल आबादी दो सौ करोड़ और अर्थव्यवस्था 372 लाख करोड़ रू. होती है। यदि इन देशों में सुमत और एकता बनती है तो विश्व की कोई शक्ति इसे नकार नहीं सकती। प्रधानमंत्री ने गणतंत्र जैसे पुनीत अवसर पर दसों राज्य अध्यक्षों को मुख्य अतिथि का सम्मान देकर भारत के प्रति सद्भावना और आत्मीयता का जो भाव जगाया है उसका स्थाई लाभ भारत को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि आसियान देशों के साथ भारत का मुक्त व्यापार होगा। भारत म्यामार और थाईलैंड 1400 किमी उच्च थल मार्ग का रास्ता आसान हुआ है। फिर समागम ऐसे समय हुआ है जब हालात प्रतिकूल हैं। दक्षिण चीन सागर में उन्मुक्त जल परिवहन के नैसर्गिक अधिकार में चीन का विस्तारवाद बाधक है, जिसका तात्कालिक कुफल आसियान बिरादरी के वियतनाम, फिलीपीन्स, मलेशिया और ब्रुनेई भोग रहे हैं। हिन्द महासागर सहित अन्य समुद्री सीमाओं में चीन का आक्रामक रवैया सभी को खल रहा है। अमेरिका ने समुद्री सीमा के मामले में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका पर अपनी मोहर लगा दी है। भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का चतुष्कोणी मंच बन चुका है। आसियान भले ही आर्थिक कारोबारी मंच हो लेकिन समय की नजाकत के अनुसार इस मंच का स्वभाव बदल गया है।
डॉ. विजयवर्गीय ने कहा कि दावोस में आर्थिक मंच के सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकासशील देशों के प्रवक्ता के रूप में उभरे थे और उन्होंने संरक्षणवाद को लेकर विकसित देशो को उनकी स्थिति बता दी थी। आसियान देशों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता साबित करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आसियान के अध्यक्ष सिंगापुर के प्रधानमंत्री का दिल जीत लिया है। उन्होंने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा है कि मोदी ने मेक इन इंडिया का आव्हान करके सभी को दावत दी है। आसियान देश भारत के प्रस्ताव पर अमल करके परस्पर हितों के मामलों में भारत का नेतृत्व स्वीकार करेंगे। (खबरनेशन / Khabarnation)