आपातकाल लगाकर कांग्रेस ने की थी संविधान की हत्याः सुहास भगत

राजनीति Jun 26, 2019

संगठन महामंत्री ने कहा-1975 में लड़ी गई आजादी की तीसरी लड़ाई

खबर नेशन/Khabar Nation  
 
भोपाल। कांग्रेस ने 25 जून 1975 की अर्द्वरात्रि को आपातकाल लगाकर संविधान की हत्या की थी। न्यायालय सहित अनेक संवैधानिक संस्थाओं के अधिकार समाप्त कर दिए गए थे। नागरिकों के मौलिक अधिकार तक समाप्त कर दिए गए थे। लगभग डेढ लाख निरपराध राजनैतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में बंद कर दिया गया था। इन लोगों को उम्मीद नहीं थी कि वे कभी जिंदा जेल से वापस लौटेंगे। इसके बाद भी हजारों की संख्या में राष्ट्रभक्त लोगों ने जेल भरो आंदोलन चलाया था और जेल गए थे। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत ने लोकतंत्र सेनानी संघ द्वारा आपातकाल की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में कही।

लोकतंत्र सेनानी संघ द्वारा आपातकाल की बरसी के अवसर पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश के लोकतंत्र सेनानियों का सम्मेलन बुधवार को आयोजित किया गया। इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत ने कहा कि आंदोलन करने वाले सत्याग्रहियों पर अनेक जुल्म और ज्यादतियां की गयी, उसके बाद भी उनके हौसले बुलंद रहे। अततः इंदिरा गांधी की तानाशाही मनोवृत्ति की हार हुई और लोकतंत्र विजयी हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस स्वयं लोकतंत्र की हत्यारी है, फिर भी बेशर्मी से लोकतंत्र की बातें करती है।

भगत ने लोकतंत्र सेनानियों से आग्रह किया कि वे यू ट्यूब और सोशल मीडिया पर आपातकाल के दौरान हुए जुल्म और ज्यादतियों की अधिक से अधिक जानकारी डालें, जिससे युवा पीढ़ी को आपातकाल में हुए अत्याचारों की जानकारी मिले। भगत ने कहा कि 1857 में प्रथम 1947 में द्वितीय और 1975 में आपातकाल के दौरान आजादी की तीसरी लड़ाई लड़ी गई और इसमें जिन लोकतंत्र सेनानियों ने जेल यातनाएं सही उनका अभिनंदन होना चाहिए। आपातकाल में जुल्म ज्यादतियों के बाद भी कांग्रेस लोकतंत्र सेनानियों को अपने उद्देश्य से नहीं डिगा पाई,  इसलिए उनका सम्मान करना समाज का दायित्व है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए लोकतंत्र सेनानियों ने जो त्याग किया है, जो बलिदान दिया है, वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से कम नहीं है। सम्मेलन को कार्यकारी अध्यक्ष भरत चतुर्वेदी, महामंत्री सुरेन्द्र द्विवेदी और स्वामी सच्चिदानंद स्वामी ने भी संबोधित किया। सम्मेलन के दौरान विकलांग लोकतंत्र सेनानी मो. लईक मियां और उमा शुक्ला का सम्मान किया गया। सम्मेलन के दौरान आध्यात्मिक गुरू स्वामी सत्यमित्रानंद जी और अन्य दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।

 

 

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