संसद में विरोध के साथ संसदीय परम्पराओं की मर्यादा भी हो

राजनीति Dec 21, 2017

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, सांसद नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि राज्य सभा के सभापति वैंकेय्या नायडू का कथन वाजिब हैं कि सड़क और सदन में अंतर हैं। जो बात सदन में नहीं कही गई उसका सदन के भीतर विरोध कैसा? संसद राजनैतिक स्कोर मारने की जगह नहीं हैं। यह लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर हैं, जहा जन अपेक्षाएं पूरा करने के लिए कानून बनाये जाते हैं। संसद पर देश की एक अरब से अधिक जनता की निगाहे लगी होती हैं कि हमारे जनप्रतिनिधि जिसे चुनकर संसद में भेजा हैं, राष्ट्र और समाज के लिए कितना समर्पित हैं। जिस तरह कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात चुनाव के दौरान कुछ कहा गया उस पर संसद को बंधक बना रखा हैं, उसे किसी भी तरह उचित नहीं कहा जा सकता।
 

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान भी इसी तरह संसद का काम काज ठप्प हुआ था, ऐसा कहकर भी कांग्रेस दोष मुक्त नहीं हो सकती। पहले तो यह कि उस वक्त भ्रष्टाचार और घोटाला धड़ाधड़ हो रहे थे। विपक्ष के आरोपों का तत्कालीन सरकार संज्ञान ही नहीं ले रही थी। तब भारतीय जनता पार्टी की यह मजबूरी थी। बाद में सीएजी ने संज्ञान लिया। न्यायालय ने आरोप सही पाये और जिन आरोपों पर केंद्र गौर नहीं कर रहा था, उसके कारण मंत्री और अधिकारी जेल भी गये। चुनाव सभा अथवा सार्वजनिक सभा में किसी ने कोई आरोप लगाया तो उसका जवाब सार्वजनिक सभा में अथवा सदन के बाहर कही भी दिया जा सकता हैं और उस पर सदन में चर्चा नहीं की जाती हैं। लेकिन कांग्रेस तीन चार दिन में जिस तरह से संसद को ठप्प किये हैं, यह सांसदों और संविधान का निरादर और संसद सदस्यों के अधिकार का हनन हैं।
 

चौहान ने कहा कि इसी तरह तर्कहीन व्यवहार असंगत आरोप लगाकर कांग्रेस ने अपनी विश्वसनीयता का क्षरण किया हैं। जनता का कांग्रेस पर से भरोसा डिग चुका हैं। हाल के चुनावों में कांग्रेस देश में सिमट कर रह गई हैं। हिमाचल की सत्ता गंवा दी हैं और गुजरात जीतने के सपने जनता ने चूर-चूर कर दिए हैं। दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारी गतिरोध दूर करने के लिए दलीय नेताओं से चर्चा कर रहे हैं। सदन का चलना सरकार की जिम्मेदारी तो हैं लेकिन उससे ज्यादा जिम्मेदारी सदन को संचालित करने की विपक्ष की होती हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)
 

 

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