पुलिस की बेशकीमती जमीन को निजी क्षेत्र को नहीं सौंपने देंगे : विभा पटेल
खबर नेशन / Khabar Nation
सरकार बताएं 342 एकड़ में क्या स्मार्ट सिटी बन गई..? 53 विभागों में 1 लाख से ज्यादा पद खाली क्यों है..?
भोपाल: मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं भोपाल की पूर्व महापौर श्रीमती विभा पटेल ने आरोप लगाते हुए कहा कि अब सरकार की नजर मध्य प्रदेश पुलिस के थानों, जिलों में पुलिस के पास उपलब्ध खरबों रुपयों की बेशकीमती भूमि पर है। जिसे सरकार निजी क्षेत्र को सौंपने की इच्छुक है। ऐसा हुआ तो ये घातक होगा। पुलिस और प्रदेश के लिए अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण फैसला रहेगा।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि पुलिस की जमीन पीपीपी मोड पर सौंपने की तैयारी है। इसके संकेत भोपाल में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सोमवार को रुस्तमजी आवास परिसर फेज-2 का लोकार्पण करते हुए दिए हैं। गृहमंत्री ने पुलिस की जमीन का उपयोग पीपीपी मोड पर करने की बात कही है। यह विचार किसी भी दृष्टि से उचित और स्वागत योग्य नहीं है क्योंकि पूर्व से मध्य प्रदेश पुलिस का बजट 8,813 करोड़ रुपए का है। जिला पुलिस के लिए 4,995 करोड़ रुपए भी आवंटित किए गए हैं। इसके बाद भी पुलिस की जमीन निजी हाथों को सौंपने के बदले पुलिस आधुनिकीकरण, नागरिक सुरक्षा के संसाधन बढ़ाने, पुलिस कर्मियों के बच्चों के स्कूल, तकनीकी एवं मेडिको लीगल संस्थान, क्रिमिनोलॉजी लैब आदि खोलने के रूप में करना चाहिए।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि ये भी चर्चा है कि पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 50 से अधिक ऐसी सेवाओं की पहचान भी की है, जिन्हें निजी हाथों में सौंपा जाना है। इसमें पासपोर्ट के लिए कैरेक्टर वेरिफिकेशन, नेताओं की एस्कॉर्ट ड्यूटी, पुलिस परीक्षा बंदोबस्त, समन डिलीवरी, रिकॉर्ड कीपिंग, पुलिस आउटडोर ट्रेनिंग जैसे बिंदु भी हैं। ऐसा होने पर मध्य प्रदेश पुलिस में 10 हजार से ज्यादा पद खत्म हो जाएंगे। युवाओं को रोजगार का अवसर नहीं मिलेगा। निजी क्षेत्र को अगर पुलिस की कई जवाबदारियां सौंपी गई तो इनके दुरुपयोग की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बेतुके निर्णय शिवराज सिंह सरकार ने पहले भी लिए हैं। ऐसे फैसला होने पर महिला कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि दोषपूर्ण नीतियों के चलते राज्य सरकार ने टीटी नगर इलाके की 342 एकड़ जमीन को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर डेवलप किए जाने पर सरकारी मकान जमींदोज किए गए। लेकिन 8 साल में न तो स्मार्ट सिटी बनी और न ही भोपाल स्मार्ट शक्ल ले सका। सरकारी कर्मचारी आवास गृह के लिए परेशान हो रहे हैं। सैकड़ों करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट के नाम पर खर्च कर दी गई। नतीजा अभी तक कुछ नहीं निकला। इसी तरह वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने के नाम पर रानी कमलापति स्टेशन को निजी क्षेत्र को सौंप दिया गया। इस फैसले से आम आदमी को कोई खास लाभ नहीं हुआ।
श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि वैसे भी राज्य की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने लगभग 28 हजार सरकारी पदों को खत्म करते हुए इनका जिम्मा आउटसोर्स कर्मचारियों को सौंप दिया है। इनसे नियमित कर्मी के रूप में काम लिया जा रहा है। लेकिन नियमित नहीं किया जा रहा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में 53 सरकारी विभागों में अलग-अलग वर्ग के 1 लाख से ज्यादा पद खाली है। इन पदों को भरने के लिए अब तक राज्य सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। आसन्न विधानसभा चुनाव को देखते हुए नई नौकरियां देने का वादा तो कर रहे हैं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की है। महिला कांग्रेस सरकारी सेवाओं का निजीकरण करने और युवाओं को नौकरी देने के झूठे वादे का सच जनता के सामने लाएगी। इसके लिए पूरे प्रदेश में जन जागरण आंदोलन होगा। निजीकरण को किसी भी शक्ल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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गौरव चतुर्वेदी
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