भाकपा(माले) रेड स्टार के राज्य सचिव विजय कुमार और ओवेश हाशमी जमानत पर रिहा
भोपाल। राष्ट्रिय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) के खिलाफ भोपाल में किए जा रहे प्रदर्शनों के चलते पिछले माह 29 फरवरी को गिरफ्तार किए गए भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) रेड स्टार के राज्य सचिव कॉमरेड विजय कुमार और साथी ओवेश हाशमी को सीजेएम कोर्ट भोपाल ने सोमवार को 10-10 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी है। पिछले तीन दिनों से केंद्रीय जेल भोपाल में बंद दोनों नेताओं को देर रात रिहा किया गया। गौरतलब है कि विजय कुमार और ओवेश हाशमी पिछले दो महीनों से भोपाल के इकबाल मैदान में नागरिकता सशोधन कानून 2019 (सीएए), एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ चल रहे सत्याग्रह में नेतृत्वकारी भूमिका में है। और वे जनविरोधी संविधान विरोधी कानूनों के खिलाफ़ लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
जेल से रिहा होने के बाद भाकपा(माले) रेड स्टार के राज्य सचिव विजय कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एक अप्रैल से जनगणना के साथ एनपीआर का सर्वे शुरू किया जा रहा है। हालही में भारत के जनगणना निदेशक द्वारा जारी आदेश में सभी राज्यों को निर्देशित किया गया है कि 1 अप्रैल से जनगणना के साथ एनपीआर का सर्वे किया जाएगा जिसमें कुल 41 प्रश्नों के भीतर 14 सवाल एनपीआर के लिए पूछें जाएंगे। आदेश से साफ है कि एनपीआर सर्वे के आधार पर देशभर में एनआरसी लागू की जाएगी।
करोड़ों गरीबों की नागरिकता छीने जाने उन्हें राज्य विहीन कर डिटेन्शन सेंटरों में भेजने के भय के चलते देश भर में एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ 2500 से ज्यादा शहरों में लगातार कई महीनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे है। इन सब को दरकिनार करते हुये एकतरफ केंद्र की मोदी सरकार तानाशाही रवैया अपनाए हुये, जिद्द पर अड़ी है तो दूसरी तरफ काँग्रेस एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ जनता को गुमराह करने के लिए मौखिक बयानबाजी तो कर रही है लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं ले रही है। मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को रोकने और खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा है। आंदोलनकारियों पर अवैध मुकदमें लादकर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा इस प्रकार के दमनकारी कार्रवाई का भाकपा(माले) रेड स्टार कठोर निंदा करती है और यह मांग करती है कि आने वाले विधानसभा सत्र में एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर एक अप्रैल से होने वाली जनगणना जिसमें एनपीआर शामिल है, पर रोक लगाए। साथ ही पार्टी केंद्र की मोदी सरकार से मांग करती है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को तत्काल वापस ले, एनपीआर और एनआरसी को रद्द करने के बाद जनगणना की जाए। पार्टी जनता से अपील करती है कि जबतक एनपीआर और एनआरसी रद्द नहीं हो जाती तबतक 1 अप्रैल से शुरू होने वाले सर्वे का बहिष्कार करें और इसके खिलाफ असहयोग आंदोलन की शुरुआत करें।