आखिर ये नाटक क्यों...?
मोदी-शाह को देना चाहिए जवाब
खबरनेशन / Khabarnation
आज शाम को जिस तरह से कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने शक्ति परीक्षण के ठीक पहले ही अपने पद से इस्तीफे के बारे में बता दिया उससे भाजपा को बहुत बडा झटका लगा होगा। इस के पहले भी दूसरों दलों को दर किनार कर के भाजपा ने कुछ राज्यों में जैसे तैसे अपनी सरकारें बनाई भी और बचा भी ली पर वो इस तरह से कर्नाटक में नहीं कर पायी।
येदियुरूप्पा की सरकार ज्यादा दिन नहीं चलने वाली हैं इस का पहला संकेत तो उस वक्त मिल गया था जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उन के शपथ ग्रहण समारोह में नहीं गये। जिन राज्यों में कम विधायक होने के बाद भी भाजपा ने अपनी सरकारें बना ली उनमें गोवा, मेघालय और मणिपुर शामिल हैं। कर्नाटक में अपनी सरकार के इस तरह से पतन का सबक भाजपा को हर हाल में ले लेना चाहिए। अंग्रेजी की एक बहुत प्रसिद्ध कहावत के अनुसार कोई कुछ लोगों को सदैव के लिये बुद्धु बना स
कता है, सारे लोगों को कुछ समय के लिये बुद्धु बना सकता हैं पर कोई भी सारे लोगों को हर समय के लिये बुद्धु नहीं बना सकता हैं। ऐसा लगता हैं कि भाजपा हर समय सब लोगों को बुद्धु बनाने के चक्कर में इस हालत में आ गई।
कर्नाटक में जो हुआ उसके लिये सब से पहले सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद इसलिये देना चाहिए क्योंकि उसके कहने पर ही शक्ति परीक्षण 15 दिनों के बजाय आज के लिये तय किया गया। वैसे तो कर्नाटक के राज्यपाल ने येदियुरप्पा सरकार को बहुमत साबित करने के लिये 15 दिन का समय दिया था। इन 15 दिनों में कर्नाटक में विधायकों के साथ क्या होता या क्या किया जाता इस के बारे में कुछ भी कहने का अब कोई मतलब नहीं हैं। वैसे तो कर्नाटक में जो हुआ उस को एक तरीके से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जीत ही मानी जायेगी। बहुत समय के बाद राहुल की कांग्रेस एक भाजपा की सरकार को गिराने में सफल रही हैं और अब इस का असर अगले साल होने वाले लोक सभा चुनाव पर क्या होगा यह देखने लायक हैं।