गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी का संबोधन
खबर नेशन / Khabar Nation
गणतंत्र दिवस 2023 (26 जनवरी, 2023)
मेरे प्यारे भाईयो, बहनो और प्यारे बच्चो,
74 वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आप सभी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं ।
साथियों,
ब्रिटिश गुलामी से ‘‘भारत को आजाद कराने का संकल्प’’ महात्मा गांधी जी ने 1947 में पूरा किया। आजाद भारत को ‘‘भारत देश की भौगोलिक काया’’ सरदार पटेल की दृढ़ इच्छा शक्ति से मिली। भारत देश को जिन सिद्धांतों और आदर्शो पर चलना है, उसका खाका ‘‘संविधान’’ के रूप में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडर की समिति ने दिया और आजाद भारत को, संसाधनों के बेहद अभाव में तथा आंतरिक और वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए, अपने पैरों पर खड़ा कर ‘‘देश को आगे बढ़ाने का पुण्य कर्म’’ पंडित नेहरू की दृढ़ एकाग्रता से प्रारंभ हुआ ।
देश और देशवासियों के बीच का एक पवित्र बंधन ‘‘हमारा संविधान - भारत का संविधान’’ 26 जनवरी, 1950 को हमारे देश का गौरव बना । आज से 73 वर्ष पूर्व विश्व के पटल पर भारत देश ने अपने गठन के उद्देश्य और चलने की राह को संविधान के रूप में प्रस्तुत किया और हर भारतवासी ने उसे सहर्ष स्वीकार किया और उसके अनुसार चलना शुरू किया । हमारे देश भारत का एक संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार 73 वर्षाें का सफर अभूतपूर्व रहा । हमने विश्व के पटल पर अपनी अनोखी और महती छाप छोड़ी । हम सबसे बड़े लोकतंत्र बने और भारत की संस्कृति और परम्परा के अनुसार लोकतंत्र की जड़ें देश में मजबूत हुई। हमने आम जनता की भलाई के लिए समाजवादी विचारों को मजबूत किया । हमने देश के नागरिकों को न्याय और स्वतंत्रता सुनिश्चित कराई । हमने देश की एकता और भाईचारे को बढ़ाने की ओर सतत् मजबूत कदम उठाये । देश के नागरिकों को अधिकार और अवसर की समानता उपलब्ध कराई। भारतीय संस्कृति और दर्शन के अनुकूल हमारा देश चला । पर अब देश की परिस्थितियां बदली जा रही हैं । संवैधानिक मूल्यों और संविधान सम्मत व्यवस्था का उल्लंघन किया जा रहा है । संविधान को अप्रभावी बनाने और संवैधानिक संस्थानों को ‘‘खोखला खिलौना’’ बनाने का काम किया जा रहा है । लोकतांत्रिक व्यवस्था को असफल, अपदस्थ एवं अप्रभावी बनाने का कार्य किया जा रहा है । ‘‘जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा’’ शासन की व्यवस्था को आज देश में ‘‘व्यक्ति का, व्यक्ति के लिए और व्यक्ति के द्वारा’’ शासन व्यवस्था में बदला जा रहा है। देश को लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण से केन्द्रीकरण की ओर बढ़ाया जा रहा है। देश को जिन नागरिकों ने गुलामी से आजाद कराया, आज उसी नागरिक से उसकी वैधता पूछी जा रही है। उसे उसकी देशभक्ति और राष्ट्रीयता प्रमाणित करने के लिए प्रश्न किया जा रहा है। नागरिक अधिकारों को चुनौती दी जा रही है। संवैधानिक व्यवस्था पर नित नये प्रश्नचिन्ह खड़े किये जा रहे हैं। आज का समय भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए चुनौतियों से भरा हुआ समय है।
आज देश और मध्यप्रदेश का हर वर्ग परेशान है, हर समाज परेशान है । हर घर चरम मंहगाई के बोझ से दब रहा है, आमजन का जीवनयापन दुर्भर हो रहा है । युवा रोजगार के लिए भटक कर परेशान हो रहे हैं। किसान खेती की नई चुनौतियों से परेशान है । व्यापारी शोषण से परेशान है । कमजोर वर्ग अत्याचार से परेशान है। बहन, बेटियां और बच्चे असुरक्षा और सम्मान बचाने को लेकर परेशान है । हमारा मध्यप्रदेश पिछड़ेपन को लेकर परेशान है, औद्योगिक अविकास को लेकर परेशान है, प्रदेश पर लाखों करोड़ों के कर्ज को लेकर परेशान है। मध्यप्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है । आज के ये हालात हमारे प्रदेश का कड़वा सच है, वो कड़वा सच, जिसे आमजन रोज जी रहा है ।
इन हालातों को बदलने का मन आपने बनाया था और 2018 में कांग्रेस को समर्थन दिया था । एक नई सुबह की शुरूआत प्रदेश में हुई थी । कांग्रेस सरकार ने अपने अल्प कार्यकाल में अपनी नीति और नियत का परिचय दिया था । हमने
शुरूआत की थी । किसान कर्जमाफी, 100 रूपये में 100 यूनिट बिजली, वृद्ध, विधवा और दिव्यांगों को बढ़ी पेंशन, अगड़ों और पिछड़ों को आरक्षण, हजारों नई गौशालाएं, शुद्ध का युद्ध, अपराधमुक्त - माफियामुक्त मध्यप्रदेश, कन्या विवाह हेतु 51 हजार की सहायता, राम वन गमन पथ, महाकाल व ओंकारेश्वर मंदिर विस्तार, सभी समाज के युवाओं को निजी उद्योगों में रोजगार के लिए आरक्षण जैसे अनेक कदमों से हमने मध्यप्रदेश की नई तस्वीर बनाने की ओर काम शुरू किया था, एक ऐसी तस्वीर जो मध्यप्रदेश की नई पहचान बना सके, परंतु प्रदेश के नव निर्माण का सफर पूरा न हो सका। परंतु मैं आप सभी को विश्वास दिलाना चाहता हुं कि हम मिलकर मध्यप्रदेश के नव निर्माण का सफर फिर शुरू करेंगे । 2023 का साल मध्यप्रदेश के भविष्य को निर्धारित करने वाला साल है । हम किसान कर्जमाफी के लिए प्रतिबद्ध हैं, हम युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हम कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हम अगड़ों और पिछड़ों के भविष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं । हर दलित और आदिवासी को हक और न्याय मिले, यह हमारी प्राथमिकता है। माताएं, बहने और बच्चे मुस्करायें, यह हमारा संकल्प है । मध्यप्रदेश निवेश और औद्योगीकरण के पथ पर तेजी से आगे बढ़े, यह हमारा संकल्प है । हम स्वास्थ्य और जल के अधिकार को धरातल पर साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं । शिक्षा और भोजन के अधिकार को नये आयाम देने के लिए संकल्पित हैं । गणतंत्र दिवस की हीरक जयंती पर हम एक साथ मिलकर मध्यप्रदेश के नव निर्माण के सपने को साकार करना प्रारंभ करेंगे ।
भारतीय संस्कृति और भारतीय मानस चुनौतियों को स्वीकार करते आये हैं और उन पर पार भी पाते आये हैं । आज देश व प्रदेश की परिस्थितियों से डरने का समय नहीं है, बल्कि उनसे लड़ने का समय है । आज का समय चुनौती से भयभीत होने का नहीं, बल्कि निडर होकर उसका सामना करने का समय है । आज का समय हिंसक विचारों का नहीं, अहिंसक विचारधारा पर चलने का है । आज का समय भारतीय संस्कृति के अनुसार चलने का है, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी और गांधी की विचारधारा पर चलने का है । भारतीय सभ्यता ने 10 हजार साल के इतिहास में ऐसी अनेक चुनौतियों का सामना किया है और उस पर विजय भी प्राप्त की है। सत्य, अहिंसा, शांति, उन्नति, प्रगति, नैतिकता, प्रेम और आनंद भारतीय संस्कृति के मूल आधारों में है । इसी दर्शन को लेकर राहुल गांधी जी देश में ‘‘भारत जोड़ो यात्रा’’ पर निकले । देश और मध्यप्रदेश बढ़-चढ़ कर भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा बना और भारतीय दर्शन का खुलकर समर्थन किया । कश्मीर से कन्याकुमारी एक है - यही भारत जोड़ो यात्रा का मूल संदेश है । भारत के मूल दर्शन के विपरीत की परिस्थितियां देश में खड़ी तो की जा सकती है पर वे स्थायित्व नहीं पा सकती क्योंकि वो भारत के जन-जन के मानस के विपरीत है। आज हमें भारत के मूल दर्शन को पुनर्बल देते हुए आत्मसात करने के नये संकल्प के साथ आगे बढ़ना है।
मैं आप सभी से अनुरोध करता हॅूं कि आप सत्य का साथ दीजिए । आप देश का साथ दीजिए । आप भारत की लोकतांत्रित संस्कृति का साथ दीजिए । आप देश और प्रदेश के भविष्य के लिए संविधान के साथ खड़े होईये। अपने और अपने बच्चों के भविष्य के लिए शांति, भाईचारे, प्रेम और एकता का साथ दीजिए। यही भारत देश का मूल भाव है, यही भारत की संस्कृति है।
जय हिन्द, जय मध्यप्रदेश, जय संविधान ।
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गौरव चतुर्वेदी
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