गरीब महिलाओं की जिंदगी बदल रही उज्ज्वला योजना
भोपाल। गुना शहर के कर्नेलगंज की रहने वाली पैंतालीस वर्षीया सगुनबाई तथा लक्ष्मीबाई, तीस वर्षीया हेमलता बाई, पचपन वर्षीया छोटीबाई, पचास वर्षीया अंगूरीबाई, पैंतालीस वर्षीया बदामी बाई, पचास वर्षीया रामबाई, पचास वर्षीया रामसुखी बाई तथा चालीस वर्षीया लक्ष्मीबाई उन महिलाओं में से हैं, जो भोजन पकाने के लिए एल.पी.जी. गैस के लिए तरसा करती थीं। उनका विश्वास था कि खाना बनाने के लिए एल.पी.जी.गैस अच्छी हैं। मगर उनके पास इतना पैसा नहीं था, जो गैस कनेक्शन,चूल्हा एवं सिलेंडर खरीद पातीं।
महज पौने दो साल पहले जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में इन महिलाओं को ना सिर्फ मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए बल्कि उन्हें गैस चूल्हे एवं सिलेंडर भी मुहैंया कराए गए। अब इन इलाकों की तकदीर ही नहीं तस्वीर भी बदली-बदली-सी नजर आ रही हैं। अंगूरी बाई को बरसात में लकड़ियां गीली होने से धुआं बहुत परेशान करता था। आंखों से आंसू और खांसते-खांसते बुरा हाल हो जाता था। कभी-कभी तो खाना ही नहीं बन पाता था। सगुनबाई को लकड़ियों एवं कंडों से खाना बनाना महंगा पड़ता था। धुंए से मकान काला पड़ गया था। मेहमान आने से ज्यादा परेशान होती थी। मुफ्त में मिले गैस कनेक्शन एवं चूल्हे से अब झट से खाना बन जाता हैं। गैस बहुत सस्ती हैं। छोटीबाई को लकड़ियों से निकले धुंए से कम दिखाई देने लगा हैं। इन्हें गैस कनेक्शन ने राहत दी हैं।
अब एल.पी.जी.गैस पर खाना बना रही हेमलताबाई की रसोई में गैस और सिलेंडर ने चूल्हे का स्थान ले लिया हैं। सस्ते में खाना बन जाता हैं और बर्तन भी काले नहीं होते। बीमारी होने का खतरा भी अब नहीं हैं। पहले लकड़ियां रोटियों पर धुआं उगल देती थीं, तो उसकी कड़वाहट से कोई रोटियां नहीं खाता था। अब हालात बदल गए हैं।
उज्ज्वला योजना के अस्तित्व में आने से गरीब तबके की महिलाओं को बीमारी होने के खतरे से निजात मिली हैं। अब तक ज्यादा समय चूल्हा-चक्की में गुजारने वाली इन महिलाओं को नई भूमिका मिली हैं। जिले में अब तक 54 हजार से अधिक गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)