क्रीड़ा अधिकारी बनकर लेखापाल ने लगाई शिक्षा विभाग में 44 लाख की चपत

खेल Feb 25, 2021


25 लाख का हिसाब नहीं मिलने पर लेखापाल उमाशंकर व्यास निलंबित

अभिषेक श्रोती / खबर नेशन /Khabar Nation

होशंगाबाद। तत्कालीन लेखापाल कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी और खुद को क्रीडा अधिकारी मानने वाले उमाशंकर व्यास को कैश बुक में 2519570 रुपए का हिसाब नहीं देने पर निलंबित कर दिया गया है। ग्वालियर लेखा परीक्षा दल ने ऑडिट रिपोर्ट में रोकड़ बही आरण संवितरण अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं किए जाने और भुगतान के वाउचर उपलब्ध ना होने पर उमाशंकर व्यास पर 4396395 रुपए के गबन धोखाधड़ी, दूर्विनियोजन के आरोप लगाया था। ऑडिट टीम ने जांच में पाया कि 2014 से 2017 के दौरान कीड़ा निधि से जमकर पैसों का भुगतान हुआ लेकिन उसके बिल बाउचर और रोकड़ बही में हिसाब किताब नहीं था। पूरे मामले की जांच करीब 2 सालों से चल रही थी। जांच के बाद कई वित्तीय अनियमितता सामने आने पर संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संतोष कुमार त्रिपाठी ने 22 फरवरी को उमाशंकर व्यास के निलंबन के आदेश जारी कर दिए। गौरतलब है कि निलंबित उमाशंकर व्यास के मामले में जिला क्रीड़ा शाखा में हो रही वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर दो शिकायत हुई थी। इसके अलावा अन्य शिकायत भी हुई थी। इसे लेकर लंबे समय से जांच की जा रही थी।

27 साल क्रीड़ा विभाग का प्रभार
जिला शिक्षा कार्यालय में 1990 से 2017 तक उमाशंकर व्यास लेखापाल के पद पर पदस्थ रहा। इस दौरान व्यास के पास क्रीड़ा शाखा का प्रभार भी रहा। एक समय था कि हर एक खेल गतिविधि और खेल शिक्षकों पर उमाशंकर व्यास की मनमानी ही चलती थी। उस दौरान कई खेल संगठनों में हस्तक्षेप और जनप्रतिनिधियों के आशीर्वाद के कारण विभाग की क्रीड़ा शाखा में होने वाली गड़बड़ियों पर अधिकारी भी बोलने से डरते थे। स्थिति यह थी कि खेल विभाग में लंबे समय से चल रही गड़बड़ियों को लेकर कई जिला शिक्षा अधिकारी आए लेकिन उन्होंने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। कहीं ना कहीं इन सभी शिक्षा अधिकारियों का भी गड़बड़ियों में सहयोग रहा है।

लापरवाह शिक्षा अधिकारी
वर्तमान में उमाशंकर व्यास विकास खंड शिक्षा कार्यालय में लेखापाल के पद पर पदस्थ है। इन गड़बड़ियों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से कई बार पत्राचार भी किए गए। संयुक्त संचालक द्वारा 2 दिन पहले निलंबन के आदेश जारी किए गए, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी रवि सिंह बघेल की लापरवाही यह है कि उन्हें अपने ही विभाग के निलंबित कर्मचारी की जानकारी नहीं है। बुधवार शाम तक उन्हें पता ही नहीं की उनका एक कर्मचारी निलंबित हो गया है। ऐसे अधिकारी को लेकर यह कहा जा सकता है कि विभाग के कर्मचारियों की मॉनिटरिंग पूरी लापरवाही से होती होगी।

प्रारंभिक गड़बड़ियों पर किया निलंबित
- उमाशंकर व्यास को अपना पक्ष रखने के लिए कई पत्राचार किए गए, लेकिन ऑडिट टीम को पुराने बिल भुगतान संबंधी जानकारी वे उपलब्ध नहीं करा सके। प्रारंभिक जांच में जो गड़बड़ियां आई है उसे लेकर उमाशंकर व्यास को निलंबित किया गया है। विभागीय जांच में कई गड़बड़ियां और सामने आएगी।
- एसके त्रिपाठी संयुक्त संचालक लोक शिक्षण नर्मदा पुरम होशंगाबाद

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