मध्यप्रदेश के आबकारी मंत्री चाहते हैं जनता ना पिए शराब

शख्सियत Jul 06, 2019

खबर नेशन / Khabar Nation

मध्यप्रदेश के आबकारी मंत्री बृजेन्द्र सिंह राठौर का कहना है कि संतो ने कहा है कि " हम सुधरेंगे तो जग सुधरेंगे " आखिर क्यों जनता शराब छोड़ने का संकल्प नहीं लेती। मध्यप्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों और अपने राजनैतिक जीवन में मुख्यमंत्री पद पर रह चुके स्वर्गीय अर्जुन सिंह से लेकर कमलनाथ तक के गुण दोषों पर उन्होंने अपनी बेबाक राय रखी।

मध्यप्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक हालातों को लेकर ब्रजेन्द्र सिंह राठौर का कहना है कि पहले सरकार चलाने में कठिनाइयां नहीं थी । गिनें चुनें राजनेता, गांव के प्रमुख, जिले में दो-चार नेता हुआ करते थे । वर्तमान में जिला सरकारों का गठन,संचार क्रांति,शिक्षा का विस्तार हर क्षेत्र में जागरूकता आई । इसके साथ ही राजनीतिक तौर पर गांव से लेकर शहर तक एक नई लीडरशिप निकलकर आई है। लोगों की अपेक्षा बड़ी । संचार क्रांति से जागरूकता आई तो अफवाह तंत्र भी मजबूत हुआ । कई बार झूठ सच के तौर पर स्वीकारते हुए देखा गया है । ऐसे हालात में काम करना कठिन हो गया है ।

प्रशासनिक हालातों पर कहा कि पहले प्रशासन तंत्र और राजनेताओं के बीच समझ थी मर्यादा थी ।हर कोई अपनी सीमा को समझता था । वो वक्त सरल था । बीते कुछ वर्षों में प्रशासन में कुछ लोग निश्चित रूप से ऐसे निकले जो राजनेताओं सा व्यवहार करने लगे और स्वयं ही उनके अधिकारों का उपयोग करने की प्रवृत्ति आ गई । जिसमें कहीं ना कहीं मतभेद की स्थति निर्मित हो गई और शासकीय कार्यों में बाधाएं खड़ी हो गई। यही कारण है कि वर्तमान में नये माहौल में तेजी से काम करने के लिए शासन संकल्पित है। अभी भी उसमें कई बार बाधाएं आती है।विगत वर्षों में मुख्यमंत्री सचिवालय का नियंत्रण कमजोर होते देखा गया। जिसमें उनके अधिकारों का उपयोग भी कुछ चुनिंदा अफसरों द्वारा किया गया।जो स्वाभिमानी और काम करने वाले अधिकारी थे उन्हें परेशानी होती रही।आज बदले माहौल में वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ जब तेजी से अपने वचन पत्र को निभाने एवं प्रदेश के विकास के लिए तेजी से योजनाएं बनाकर क्रियान्वयन का प्रयास कर रहे हैं वहीं कई तरह की बाधाएं आ रही हैं।कम बहुमत एवं प्रशासनिक बाधाओं के कारण उतनी गति प्राप्त नहीं हो पा रही है। वर्तमान मुख्यमंत्री अनुभवी हैं व्यवस्था परिवर्तित होती है तो वक्त लगता है । मैं विश्वास करता हूं कि उनके नेतृत्व में बाधा को पार करते हुए नियंत्रण में रखकर तेज गति से मध्य प्रदेश का विकास भी होगा । साथ ही गरीब जनमानस के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन शीघ्रता से पूर्ण होगा । 

अवैध शराब और शराब बंदी को लेकर आबकारी मंत्री बृजेन्द्र सिंह राठौर का कहना है कि व्यक्तिगत रूप से मेरा ऐसा मानना है कि सरकार के फरमान जारी होने या नियम बनाने से समस्या खत्म नहीं हो जाती ।जब तक आम जन में स्वयं कुछ परिवर्तन की चाह ना हो । उदाहरण के तौर पर जहां-जहां शराब बंदी हुई जानकारी मिलती है,उस जगह पर सबसे ज्यादा सेवन हो रहा है और गलत तरीके से । इसलिए जरूरत है स्वयं बदलने की । संतों ने सही कहा है हम बदलेंगे तो जग बदलेगा । मध्य प्रदेश के जो हालात हैं विगत वर्षों में भाजपा सरकार थी तब अवैध संचालन की प्रवृत्ति ज्यादा निर्मित हुई । इस कारण सरकार को राजस्व कम प्राप्त हुआ एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला । हमारी कोशिश रहेगी कि अवैध तरीके से होने वाले कामों पर अंकुश लगाएं ताकि राजस्व में बढ़ोतरी हो  और गरीबों के हित के विकास की योजनाएं संचालित हो सकें । भ्रष्टाचार पर रोक लगे इन बातों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के संशोधन करने का प्रयास कर रहे हैं । उदाहरण के रूप में कुछ विशेष श्रेणी के होटल यदि उन्हें होटल बार का लाइसेंस रिनुअल कराना हो तो उन्हें कई कार्यालय की परिक्रमा करना पड़ती थी । साथ ही कई महीनों का वक्त भी बर्बाद होता था । कैबिनेट से भी निर्णय हुआ है ऐसे लोग को परिक्रमा करने की आवश्यकता नहीं है । ऑनलाइन आवेदन 7 दिन में रिन्यूवल हो जाएगा । यदि आबकारी विभाग 7 दिन में नवीनीकृत नहीं करता है तो आठवें दिन स्वयं नवीनीकरण माना जाएगा । ऐसे और भी कई निर्णय हैं जिससे अवैध तरीके से बिकने वाली मदिरा पर नियंत्रण होगा और जो पैसा बिचौलियों के पास जाता था राजस्व के खजाने में जमा होगा। ताकि गरीबों के हित में अच्छी योजनाएं संचालित कर सकें ।

अवैध शराब की बिक्री रोकने और नियंत्रण को लेकर श्री राठौर का कहना है कि मैंने पहले भी कहा सरकारी नियंत्रण के लिए काम मुस्तैदी से शुरू कर दिया है । सरकार ताकत से निपटेगी । काम की गारंटी के लिए मनरेगा, सूचना का अधिकार खाद्यान्न कानून हैं । उसी तरह मध्यप्रदेश में पानी के लिए भी सरकार कानून बनाने जा रही हैं । उनका अधिकार हो सरकार ने निर्णय लिया है निवेश बढ़ाना चाहते हैं । उद्योग को सहयोग करना चाहते हैं पर 70% नौजवानों को नौकरी देना होगी । गौवंश के नाम पर कई लोगों की हत्या हो जाती है ।उसके ऊपर अंकुश लगाने के लिए कानून ला रहे हैं ।

शराब बंदी को लेकर श्री राठौर ने कहा कि

समय के साथ समाज में भी बहुत परिवर्तन हुए हैं ।देर रात तक काम करना और उसके साथ देर रात भोजन करना और मदिरापान करना दिनचर्या में शामिल हो रहा है । सरकार अपनी तरफ से मधपान को व्यवस्थित करने आमजन से सुझाव एकत्रित कर रही है । अच्छे सुझाव एवं अनुरोध पर सरकार काम करेगी । मैं समाज के बुद्धिजीवियों से यह निवेदन करना चाहता हूं कि सरकार क्या करेगी उसके पहले हम खुद को भी बदलें और ऐसे पदार्थों के सेवन से बचें । मैं तो चाहता हूं कोई ना पिए शराब लेकिन उसके बावजूद लोगों का मन नहीं मानता तो हमारा कर्तव्य है कि उन्हें सुविधा दें और नियंत्रण करें । पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा देने आबकारी नियमों में संशोधन कर रहे हैं । इससे ना सिर्फ रोजगार मिलेगा देश विदेश में हमारी छुपी हुई संस्कृति सभ्यता और विरासत लोगों तक पहुंचेगी । पर्यटन से जुड़े जितने व्यापार हैं उसमें बढ़ोतरी होगी ।जिससे प्रदेश के विकास में वातावरण तैयार होंगे । मुख्यमंत्री की सोच है ज्यादा से ज्यादा बेरोजगारों को काम दे ।कम पढ़े लिखे नौकरी नहीं निजी व्यवसाय से जुड़ सकें ।जमीन पर आधुनिक तरीके से बागवानी खेती वृक्षारोपण का काम प्रारंभ हो ताकि नौजवानों को भटकने से बचा सके ।

मध्यप्रदेश के पूर्व एवं वर्तमान मुख्यमंत्रियों पर अपनी बेबाक राय

अर्जुन सिंह जी को मैंने देखा बोलते बहुत कम थे, लेकिन कलम बड़ी असरकारक थी । मोतीलाल वोरा जी स्वभाव से बहुत सरल थे । सुन्दर लाल पटवा अनुशासन के मामले में सख्त थे । दिग्विजय सिंह की शालीनता उनकी याददाश्त और काम करने की शैली एकदम अलग थी । छोटे से छोटे गांव में जाकर नाम से बुलाते थे और गरीबों तक सीधी पहुंच रखते हैं। विरोधी को भी अपना बनाने में माहिर । उमा भारती बोलने में बहुत निपुण हैं ।

बाबूलाल गौर साहब सरल थे और सब के साथ दोस्ताना माहौल में काम करते थे । शिवराज सिंह चौहान भाषा के क्षेत्र में और झूठ को सच की कला बनाने में माहिर हैं। शिवराज अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी चाहे वो अंदर या बाहर का हो उसे निपटाने में भी सरलता से माहिर हैं। कमलनाथ में अनुशासन , काम करने की इच्छा और छिंदवाड़ा के तर्ज पर मध्य प्रदेश का विकास करने की ललक है । कमलनाथ किसी के साथ भी द्वेष भावना के साथ काम नहीं करते हैं और जबरदस्त प्रशासनिक क्षमता के धनी हैं ।

कमियों के बारे में बताते हुए कहा कि अर्जुन सिंह अगर किसी के बारे में धारणा बना लेते थे वह भले सच हो या गलत आसानी से बदलते नहीं थे ।

मोतीलाल वोरा जी को काम करने का कम समय मिला जिसके चलते हैं वे प्रशासन पर पकड़ नहीं बना पाए । सुंदर लाल पटवा जी लगभग अर्जुन सिंह की तरह धारणा बना कर काम करते थे ।

उमा भारती कान की कच्ची और चापलूस जो समझा देते थे उस धारणा पर काम करती थी । उमा भारती काम पहले करती थी सोचती बाद में थी । अगर वे सही तरीके से काम करती तो बुन्देलखण्ड के विकास के लिए ज्यादा योगदान दे सकते थे । बाबूलाल गौर साहब ने नगरीय प्रशासन मंत्री रहते हुए जिस सख्ती के साथ काम किया वैसा मुख्यमंत्री रहने के दौरान प्रशासन पर पकड़ नहीं बना पाए ।

शिवराज सिंह चौहान ने सरकारी पैसे का अपने स्वयं के प्रचार पर भारी दुरुपयोग किया। उन्होंने कुछ गिने-चुने अधिकारियों के साथ सरकार का संचालन किया । जिससे भ्रष्टाचार को बल मिला । कमलनाथ जी के बारे में मेरी व्यक्तिगत राय है कि अपने मंत्रियों के साथ और ज्यादा समय दें । साथ ही उनके विचारों को भी समाहित करने का प्रयास करें ।

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