बेबस मोदी-शाह , शिवराज या भाजपा ?

 

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल गठन न कर पाने का दोषी कौन ?
खबर नेशन / Khabar Nation
मंत्रिमंडल विस्तार , फेरबदल या गठन मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है । वे किसे रखें या ना रखें यह उनकी निजी पसंद मानी जाती है । ऐसा हम नहीं कह रहे भारतीय जनता पार्टी का एक एक कर दिग्गज नेता समय समय पर कहता आया है । विगत तीन महीनों से मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल को लेकर चल रहे घटनाक्रम और ख़ासकर पिछले सात दिनों की शिवराज और भाजपा संगठन की कवायद एक नई कहानी सुना रही है । संगठन में समन्वय, सर्वानुमति और संतुलन की कवायद करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बंधे हुए हाथ नजर आ रहे हैं । नज़र आ रहा है एक बेबस मुख्यमंत्री ? क्या सचमुच शिवराज बेबस हैं विचार करने योग्य है......
भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान केन्द्रीय राजनीतिक जोड़ी अभी तक की सर्वश्रेष्ठ जोड़ी मानी जाती है । चाहे किसी आरोप की हवा निकालना हो, चाहे किसी राजनीतिक विरोधी को निपटाना हो या पार्टी और संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत दिखानी हो। हर क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का कोई जोड़ नहीं है । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा भी मोदी शाह की सलाह के बिना कदम नहीं उठाते है । जिस पार्टी में हमेशा से समन्वय, सर्वानुमति, संवाद के सहारे निर्णय लिए जाते रहे हो उसमें मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल गठन और विस्तार का पहला मामला है जिसे लेने में भाजपा तो बेबस नजर आ ही रही है सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर के तौर पर जाने जाने वाले मोदी और शाह भी बेबस नजर आ रहे हैं । कुछ सवाल खड़े होते हैं जिनका जवाब मध्यप्रदेश की राजनीति के लिए तो जरुरी है ही भाजपा संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण है ।
क्या वाकई में भाजपा के अंदर इतनी सिर फुटौव्वल है या इसे महज दिखाने का प्रयास किया जा रहा है ?
क्या मुख्यमंत्री के विशेष अधिकार भाजपा संगठन द्वारा अपने कब्जे में लिए जाने या अड़ंगा डालने का प्रयास एक मुख्यमंत्री के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जाना चाहिए ?
क्या भारत के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अब इस तरह से राज्यों के छोटे छोटे मामलों में हस्तक्षेप करेंगे ? जब देश में सीमा पर चीन, नेपाल और पाकिस्तान सर उठा रहे हों और देश में विश्वव्यापी कोविड 19 कोरोना वायरस संक्रमण नामक बीमारी कहर बरपा रही हो ।
कांग्रेस के शासनकाल में अक्सर यह सुनने को मिलता था कि केन्द्र मजबूत रहता था तो राज्यों पर नेतृत्व हावी हो जाता था । लेकिन जब केन्द्र कमजोर रहता था तो राज्य हावी हो जाते थे । आखिर असल वजह क्या है जिस तरह केन्द्र की ताकतवर जोड़ी के होते मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल गठन में असफलता हाथ लगी है कही वह केन्द्र के कमजोर होने की और इशारा तो नहीं कर रही ।

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