ज़िन्दगी के फलसफे को बयां करने का एक जरिया है नाट्य कला

मनोरंजन May 28, 2019

खबरनेशन/Khabarnation  

इंदौर। नाट्य शास्त्र कला या रंगमंच असल में ज़िन्दगी के फलसफे को बयां करने का एक जरिया भी है। हक़ीक़त में नाट्य  कला या अदाकारी मामूली चीज़ नहीं है बल्कि  इंसान की जिंदगी के कई किस्से अपनी कला के जरिए दुनिया के सामने लाने का साधन है। ये एक वो ताकत है, जिसमें अपनी कला के ज़रिये से अभिनय की छाप एक कलाकार छोड़ देता है।

समाज में नाट्य कला को ज़िंदा रखने के लिए पर जोर देना चाहिए। उक्त विचार युवा अभिनेता सचिन खुराना ने एक्टिंग वर्कशाप के समापन अवसर पर व्यक्त किये। रूमा नाट्य शास्त्र एक्टिंग इंस्टिट्यूट द्वारा 7 दिन एक्टिंग वर्कशॉप में एक्टिंग से जुड़ी बारीकियों और भविष्य की संभावनाओं से रूबरू करवाया गया।वर्कशॉप सभी वर्ग के लिए रखी गई थी क्लास में लगभग 80 से 90 कलाकारों ने भाग लिया। वर्कशॉप के समापन के अवसर लीड रोल निभाने वाले युवा अभिनेता सचिन खुराना एवं रूमा प्रोडक्शन के ब्रजमोहन कोहली ने बच्चों को नाट्य कला एवंम सीरियल के लिए कैसे मुक़ाम बनाएं बताया। 

उन्होंने जानकारी दी कि फिल्म में किस तरह काम किया जाता है।बच्चों का सीरियल व फ़िल्म के लिए चयन भी किया गया। रूमा नाट्य शास्त्र एक्टिंग इंस्टिट्यूट के रोहित राज नायक और यश सोनी ने बताया कि वर्कशाप के माध्यम से छिपी हुई प्रतिभा  सामने आईं और उन्हें एक प्लेटफार्म भी मिला। उन्होंने ये भी बताया कि रूमा नाट्य शास्त्र इंस्टिट्यूट के प्रशिक्षित बच्चे मुम्बई में फिल्मों में और सीरियलो में काम कर रहे हैं और स्थापित हो गए हैं। यहाँ के सिखाये हुए बच्चे दबंग 3,वसावधान इंडिया, पेडमेन मूवी, मुस्कान, स्टार भारत और कई बहुत सारी फिल्मों व सीरियलो में अपनी अदाकारी से पहचान बनाने में सफल हुए हैं।

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