टीम श्रीमंत के साथ न हो जाए - माफ करो महाराज


20 सदस्यों को है मंत्री मंडल के विस्तार का इंतजार 


गीत दीक्षित / खबर नेशन/Khabar Nation
भोपाल। मध्यप्रदेश में टीम श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा के बीच अब तक पटरी नहीं बैठ पाई है, शायद यही वजह है कि अब तक प्रदेश में मंत्री मंडल का उचित ढ़ंग से गठन नहीं हो पाया है। एक मुखिया और 5 मंत्रियों के सहारे प्रदेश सरकार चल रही है। मंत्रीमंडल के गठन को लेकर फिलहाल कोई एकराय बनती नजर नहीं आती। यह भी संभावना कम ही है कि टीम श्रीमंत के ज्यादातर सदस्यों को मंत्रीमंडल में जगह मिल ही जाएगी। कयास तो यह भी लगाए जा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव तक मंत्री मंडल का विस्तार ही न हो।
कोविड 19 महामारी के चलते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री का दायित्व तो संभाल लिया, लेकिन वह अपनी मनमर्जी के मुताबिक मंत्री मंडल का गठन नहीं कर पाए। कारण यह है कि पिछले कार्यकालों की बजाय इस बार परिस्थितियां थोड़ी भिन्न हैं। जिसके कारण मंत्री मंडल के विस्तार में कठिनाई आ रही है, वजह साफ है कि एक तरफ तो उन्हें कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए सिंधिया समर्थकों को जगह देनी है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा विधायक को साधना है और संघ की मंशा का भी पूरा ख्याल रखना है। श्रीमंत की प्रेशर पॉलिटिक्स के चलते जैसे तैसे मंत्रीमंडल में महाराज के समर्थक दो विधायकों सहित पांच को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। हालांकि कोराना महामारी का खतरा अभी कम नहीं हुआ है, लेकिन फिर भी ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है कि मंत्री मंडल का विस्तार किया जा सकता है।
19 जून के बाद हो सकता है मंत्री मंडल का विस्तार :- भले ही कई बार मंत्री मंत्रीमंडल के विस्तार की चर्चाएं चली लेकिन इस बार मंत्री मंडल का विस्तार होना लगभग तय माना जा रहा है। राज्यपाल लालजी टंडन के 19 जून को आने के बाद मंत्रीमंडल के गठन की संभावनाएं बन रही हैं।
2 बने मंत्री, 20 को है इंतजार : प्रदेश में 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में से 22 वह सीटें हैं, जिन पर की महाराज के कट्टर समर्थक विधायक जीतकर आए थे। इन विधायकों के इस्तीफे के कारण ही कांग्रेस की सरकार गिरी और फिर उपचुनाव की स्थिति निर्मित हुई। टीम श्रीमंत के अन्य सदस्य भी अब इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि कब मंत्रीमंडल का विस्तार हो और उन्हें सरकार का हिस्सा बनने का अवसर मिले।
*सिंधिया को ज्यादा सीटें देने पर आपत्ति :- भाजपा कट्टर बिग्रेड नहीं चाहती सिंधिया खेमे से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस से आए पूर्व विधायकों को टिकट दिया जाए। जबकि दूसरी तरफ महाराज भाजपा में कांग्रेस की तरह प्रेशर पॉलिटिक्स करने लगे हैं। भले ही ये भाजपा की रीति-नीति के विरुद्ध हो, लेकिन महाराज के लोगों को मंत्री मंडल में शामिल तो किया जाएगा ही, ये अलग बात है कि उनकी संख्या कितनी होगी। 

 का राज्यसभा में जाना तय :- महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया का राज्यसभा में जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा केन्द्रीय मंत्री मंडल में भी उन्हें स्थान मिल सकता है, लेकिन प्रदेश की राजनीति में उनका कद विधानसभा के उपचुनाव में जीते उनके समर्थक ही तय करेंगे।
माना जा रहा है कि महाराज की जो पैठ कांग्रेस में थी, उस तरह की पैठ वह भाजपा में जमाने में कमजोर साबित हुए हैं। अब इस बात को आप भाजपा नेताओं की मजबूत जड़ों से जोड़कर देख सकते हैं। फिलहाल जो स्थितियां निर्मित हो रही हैं उनको देखकर ये कहा जा सकता है कि कहीं ऐसे हालात न बन जाएं कि भाजपा को फिर कहना पड़े   माफ करो महाराज'।

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